• सरकार और कर्मचारी संगठनों की मैराथन मीटिंग ने खोला रास्ता • कर्मचारियों के मुद्दे पर 20 अक्टूबर तक सरकार को मिल जाएगी रिपोर्ट • पंजाब के समान वेतनमान का चुनावी वायदा याद दिलाया कर्मचारियों ने सरकार को कर्मचारियों को सातवें केंद्रीय वेतन आयोग का लाभ देने के लिए गठित की गई कमिटी 20 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंप देगी। वित्त विभाग द्वारा गठित कमिटी के पास 176 प्रतिवेदन आ चुके हैं।

कैप्टन अभिमन्यु, वित्त मंत्री
कई साल से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन चला रहे हरियाणा के लाखों पक्के-कच्चे कर्मचारियों को गोल्डन जुबली ईयर में खुश करने की तैयारियां हो रही हैं। एक कमिटी द्वारा कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों समेत अन्य समस्याओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है जो 20 अक्टूबर यानि हरियाणा के स्थापना दिवस से 10 दिन पहले सरकार को रिपोर्ट सौंप देगी।
इसकी बुनियाद सोमवार को चंडीगढ़ में मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अगुवाई वाली कमिटी और हरियाणा के कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग की अगुवाई करने वाले सर्व कर्मचारी संघ,
मिनिस्ट्रीयल स्टाफ असोसिएशन और कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों के बीच घंटों चली मैराथन मीटिंग में रखी गई। बैठक के बाद यूनियन के नेताओं ने कहा कि सरकार का रुख सकारात्मक है। प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी मीडिया से बातचीच में कुछ ऐसा ही रुख जाहिर किया और कहा कि कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें का फायदा जल्द मिलेगा। खास बात रही कि लंबे समय बाद सरकार और कर्मचारियों के बीच पटरी बैठती नजर आ रही है लेकिन, कर्मचारी नेताओं ने हरियाणा के कर्मचारियों को पंजाब के समान वेतनमान वाले चुनावी वायदे की याद भी दिला दी है। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों की आमने-सामने की बैठक में कर्मचारी नेताओं ने कई पुराने मुद्दे उठाते हुए सुझाव दिए वहीं मुख्य सचिव की अगुवाई वाली अफसरों की कमिटी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से पहले छठे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां दूर करने के सुझाव से सहमत दिखी। कर्मचारी नेताओं को उम्मीद है कि समान काम के लिए समान वेतनमान देने और न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये मासिक करने के कर्मचारी संगठनों के सुझाव भी माने जा सकते हैं। सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान धर्मबीर फोगाट और महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि बैठक में छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करने के लिए गठित जी. माधवन कमिटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक न किए जाने पर ऐतराज जाहिर किया गया। बोर्ड, निगम और विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों की सुनवाई ही नहीं की गई। लांबा ने कहा कि छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर किए बिना सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू न करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा सरकारी, अर्ध सरकारी, बोर्ड, निगम, विश्वविद्यालयों और निकाय कार्यालयों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें एक साथ लागू करने का भी सुझाव दिया गया। गोल्डन जुबली ईयर : कई मांगें हो सकती हैं पूरी
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